भारतीय बैंकिंग क्षेत्र का अवलोकन - बैंकिंग सेवाओं और

मुद्रा बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली

मुद्रा बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली

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विश्व बैंक
विश्व बैंक की स्थापना जुलाई 6999 को हुई थी। इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉर्जिया है।विश्व बैंक एक विशिष्ट संस्था है। जिसमें संगठन सम्मिलित हैंः IBRD ,( अंतर्राष्ट्रीय विकास परिषद IDA), अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम( IFC), बहुपक्षीय विनियोग गारंटी संस्था(MIGA), इंटरनेशनल सेंटर फॉर सेटलमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट डिस्प्यूट(ICSID)| इसका उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों को पुनर्निर्माण और विकास के कार्यों में आर्थिक सहायता देना है। विश्व बैंक समूह 5 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का एक ऐसा समूह है जो सदस्य देशों को वित्त और वित्तीय सलाह देता है। विश्व बैंक से अभिप्राय सामान्यतः IBRD तथा IDA से है। इन सभी 5 संस्थाओं को विश्व बैंक समूह के नाम से जाना जाता है। औपचारिक रूप से आई बी आर डी की स्थापना 6995 में हुई। पर इसने वास्तव में 6996 से कार्य करना शुरू किया।

शेयर बाजार: बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने बनाया दबाव

बैंक ऑफ़ बड़ौदा में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत मुद्रा ऋण (शिशु, किशोर और तरुण) प्रदान किया है. आज ही मुद्रा ऋण के लिए आवेदन करें और अपने व्यवसाय को बढ़ाएं.

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शेयर बाजार: बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने बाजार में भरा जोश

बैंकिंग के विकास ने बहुत सी बाधाएं और तनाव को पार किया है। बैंकों ने अपनी सेवाओं के विपणन के महत्व को महसूस किया है, ताकि बाजार में गला काट प्रतिस्पर्धा से बच सकें। वर्तमान बैंकिंग उद्योग में ग्राहकों की संतुष्ट करना सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है। बाजार में जीवित रहने के लिए उन्हें अपनी मार्केटिंग रणनीतियों को बहुत प्रभावी ढंग से लागू करना होगा।

वित्तीय सहायताः यह अपने सदस्यों को भुगतान समस्याओं के संतुलन आई एम एस फाइनेंस इन द्वारा समर्पित आईएमएफ के साथ करीबी सहयोग में राष्ट्रीय प्राधिकरण डिजाइन समायोजन कार्यक्रम को सही करने के लिए धन मुहैया कराता है। इन कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन पर सशक्त वित्तीय समर्थन जारी रखता है।

प्रौद्योगिकी के निरंतर विकास के साथ भारतीय बैंकिंग उद्योग विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है। ये डीरेग्यूलेशन, दक्षता, डिफ्यूज़्ड कस्टमर लॉयल्टी और कम्पीटिशन गैप हैं।

6. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष क्या है ?
7.अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के क्या उद्देश्य हैं ?
8.अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के क्या कार्य हैं ?
9.एसडीआर क्या है?
5.विश्व बैंक से क्या समझते हैं?
6.विश्व बैंक के क्या उद्देश्य है?
7.विश्व बैंक के सदस्यता एवं मताधिकार के बारे में बताएं?
8.विश्व बैंक में कौन-कौन से सुधार किए गए हैं?
9. विश्व बैंक के क्या कार्य हैं?

मुद्रा ऋणों को, उद्यमों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने के लिए या “फंड दी अनफंडेड” के लिए बनाया गया है. पीएमएमवाई योजना के अंतर्गत विनिर्माण, व्यापार एवं सेवाओं के माध्यम से आय सृजन में लगे गैर-कृषि, सूक्ष्म या लघु उद्यमों के लिए ऋण प्राप्त होते उपलब्ध है. कृषि संबंधी गतिविधियों में शामिल उद्यम भी मुद्रा ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं.

कर-मुक्त बॉण्ड में अर्जित ब्याज को कर से मुक्त रखा जाता है। ऐसे बॉण्ड की अवधि आमतौर पर 65, 65 या 75 वर्ष की होती है। ये बॉण्ड निवेशकों को एग्जिट रूट की पेशकश करने के लिये स्टॉक एक्सचेंजों में भी सूचीबद्ध किये जाते हैं। ये बॉण्ड प्रकृति में कर-मुक्त, सुरक्षित, प्रतिदेय और अपरिवर्तनीय हैं। इस तरह के बॉण्ड को स्टॉक एक्सचेंजों में भी सूचीबद्ध किया जाता है और केवल डीमैट खातों के माध्यम से इनका कारोबार किया जाता है। प्रकटीकरण और निवेशक सुरक्षा दिशा-निर्देशों के तहत सेबी द्वारा परिभाषित योग्य संस्थागत निवेशक इन बॉण्डों में निवेश कर सकते हैं। ट्रस्ट, सहकारी और क्षेत्रीय बैंक तथा कॉर्पोरेट कंपनियों जैसी संस्थाएँ भी कर-मुक्त बॉण्ड में नियमित रूप से निवेश करती हैं। 96 १ 98

भारत बिल भुगतान प्रणाली एकीकृत बिल भुगतान प्रणाली के संचालन हेतु एक स्तरीयकृत संरचना है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India- NPCI) द्वारा अधिकृत भारत बिल भुगतान, केंद्रीय इकाई के रूप में कार्य करता है, जो सभी प्रतिभागियों के लिये तकनीकी एवं व्यावसायिक आवश्यकताओं, व्यावसायिक मानकों, नियमों तथा प्रक्रियाओं की स्थापना हेतु ​ज़िम्मेदार है। BBPS के तहत भारत बिल भुगतान परिचालन इकाइयाँ रोजमर्रा की उपयोगी सेवाओं जैसे- बिजली, पानी, गैस, टेलीफोन तथा डायरेक्ट-टू-होम (DTH) के लिये बार-बार किये जाने वाले भुगतानों की सुविधा प्रदान करने वाली संस्थाओं के रूप में कार्य करती हैं।


नेशनल हाउसिंग बैंक ने तरलता जोखिम के खिलाफ एहतियाती उपाय के रूप में हाउसिंग फाइनेंसिंग कंपनियों (HFC) की पूंजी पर्याप्तता अनुपात को 65% तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। CAR, बैंक की उपलब्ध पूंजी का एक माप है जिसे बैंक के जोखिम-भारित क्रेडिट एक्सपोज़र के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। पूंजी पर्याप्तता अनुपात को पूंजी-से-जोखिम भारित संपत्ति अनुपात (capital-to-risk Weighted Assets Ratio-CRAR) के रूप में भी जाना जाता है। इसका उपयोग जमाकर्त्ताओं की सुरक्षा और विश्व में वित्तीय प्रणालियों की स्थिरता और दक्षता को बढ़ावा देने के लिये किया जाता है। नेशनल डिफेंस फंड के तहत शहीदों के परिवार के लड़कों को दी जाने वाली स्कॉलरशिप में 555 रुपए की बढ़ोतरी की गई तो लड़कियों को दी जाने वाली राशि में 755 रुपए बढ़ाए गए हैं।

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