सुपर सीएम अमन सिंह नहीं चाहते थे कि बघेल मुख्यमंत्री बने

सिंह व्यापारी पनामा

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जवाब- नये सिस्टम में एक जुलाई से पुराना टैक्स इनवाइस नहीं चलेगा। नया प्रोफार्मा जीएसटी की साइट पर है। अब टैक्स इनवाइस ही जारी होगा। सेल इनवाइस का सिस्टम खत्म है।

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जवाब- इसके लिए बिल ऑफ सप्लाई की नई व्यवस्था है। जैसे सेल इनवाइस होती थी, प्रारूप कोई नहीं है। नाम, पता अपना जीएसटीएन नंबर, जिसने परचेज किया है, उसका नाम-पता या जीएसटीएन नंबर लिख कर जारी करें।

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फिर एक वक़्त आया. बुरा वक़्त. अमर सिंह को समाजवादी पार्टी से बाहर कर दिया गया. जातिगत राजनीति, पार्टी के खिलाफ काम, समाजवादी सोच के खिलाफ काम. और भी कई सारे आरोप थे. उनके साथ जया प्रदा को भी बाहर किया गया. जया बच्चन ने अपना निर्णय लिया और समाजवादी पार्टी में बनी रहीं. यहीं से बच्चन परिवार के साथ उनकी खटास शुरू गयी. सच तो ये है कि उनकी खटास जीवन के हर क्षेत्र में आ चुकी थी. यह वही जया प्रदा उनके साथ थीं, जिन्होंने इनको हेलीकॉप्टर से गिरते और उठते देखा था इनके जीवन की तरह.

अब वो समाजवादी पार्टी के राज्यसभा के सांसद हैं बेनीप्रसाद वर्मा के साथ. जी हां! उन्हीं के साथ. ये कहानी जारी रहेगी. अमर सिंह जब तक इस धरती पर रहेंगे. उनकी मधुशाला चलती रहेगी निशिदिन. राजनीतिज्ञ, सितारे, व्यापारी, पत्रकार, जनता और हमारे जैसे लोग इस मधुशाला में आते रहेंगे. सही और गलत का फैसला इनकी मधुशाला के पियक्कड़ नहीं कर सकते. वो या तो जज करेंगे या ऊपरवाला. या खुद अमर सिंह.

6996 में मुलायम सिंह से उनकी एक यूं ही वाली मुलाक़ात हो गयी. मुलायम जी की अपनी पार्टी चार पांच साल पुरानी थी और ज्यादातर ग्रामीण परिवेश से जुडी थी. दिल्ली की सत्ता में मुलायम डिफेन्स मिनिस्टर के रूप में कदम रख चुके थे देवेगौड़ा के सरकार में. पर 95 के अमर सिंह की युवा सोच और कनेक्शंस उनको भा गए. उन्होंने अमर सिंह को अपनी गिरफ्त में ले लिया. वो समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता बन गए. राज बब्बर, आजम खान, रामगोपाल यादव, बेनी प्रसाद वर्मा ( हाँ, यही वाले जो राज्यसभा जा रहे हैं) सबको पछाड़कर और दुखी कर अमर सिंह मुलायम के चहेते बन गए. फिर क्या, समाजवादी पार्टी ग्रामीण परिवेश से निकल कर बॉलीवुड, कॉर्पोरेट और न जाने किस किस से ताल्लुकात बढ़ाती चली गयी. अमर सिंह सुपर स्टार बन गए. और मुलायम रजनीकांत. सैफई वाली इन्द्रसभा उसी नास्टैल्जिया का रूमानी अंदाज है.

8. इंदौर के युवाओं को, मप्र के युवाओं को रोजगार नहीं मिलता है, किसानों को कर्ज नही मिलता है, लेकिन अनिल अम्बानी को 85 हजार करोड़ कर्जा दे दिया।

अमर सिंह ने 7566 में राष्ट्रीय लोक मंच नाम से पार्टी बनायी और हर चुनाव हारे. फिर उन्होंने एक तरह से संन्यास ले लिया. कहते थे ऐसा. सच ये था कि उनको दे दिया गया था. पर खिलाड़ी हार मान ले तो खिलाड़ी कैसा! अमर सिंह दांव चलते रहे. चलते रहे. अमिताभ बच्चन का नाम प्रेसिडेंट के लिए प्रस्तावित किया मीडिया में. साथ ही सिलसिला की कहानी को सच्ची भी बताते थे. पनामा वाले मामले में कुछ कुछ बोलते रहे जिसको किसी ने सुना नहीं. फिर एक आईआरएस महिला ऑफिसर से माफी भी मांगी, जिसको इन्होंने अमिताभ की हेल्प के लिए परेशान किया था और उसने रिजाइन कर दिया था. कभी इन्होंने नरेन्द्र मोदी को बहुत ही अच्छा आदमी बताया. कभी सोनिया गांधी को.

राहुल की सभा में शामिल नहीं होने पर दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया कि मुझे संगठन ने आवश्यक कार्य सौंपा है, इसलिए कार्यक्रम में अनुपस्थित रहूंगा। क्षमा करें। मैं इंदौर में पैदा हुआ, स्कूल व कॉलेज की पढ़ाई भी वहीं हुई।

जवाब- आईटीसी दो तरीके से मिलेगी। एक स्टेट जीएसटी की मिलेगी और एक सीजीएसटी की। एसजीएसटी मतलब जो वैट आप ने दिया है उसका 655 परसेंट लाभ आपको मिलेगा।

7558 में अमर सिंह का कद बढ़ा देश की राजनीति में जब उन्होंने कांग्रेस की सिविल न्यूक्लिअर डील के तूफ़ान में उड़ते खप्पर को बचा लिया.

65. मोदी के गब्बरसिंह टैक्स में हर महीने रिटर्न भरना पड़ता है। कांग्रेस सरकार आई तो एक टैक्स वाला असली जीएसटी लागू करेंगे। आपको परेशान नहीं होना पड़ेगा।

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