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चीनी ऐप पर पाबंदी: डेटा विदेशी सर्वर में क्यों स्टोर होता

हालांकि बलविंदर इसपर अलग राय रखते हैं, उनका मानना है कि "किसी भी सर्वर में डेटा पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है."

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इसके अलावा ज़रुरत के मुताबिक़ भी सर्वर का चयन किया जाता है. स्टैक्यू नाम के एक स्टार्टअप के सीईओ अतुल राय बताते हैं, "सर्वर ये देखकर भी लिया जाता है कि जिस काम के लिए आपको ज़रुरत है, उस सर्वर की उतनी क्षमता है या नहीं, किसी दूसरे देश में बेहतर क्षमता वाला प्रोसेसर मिल जाए तो कंपनियां उसके पास चली जाएंगी."

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ज़्यादातर जिन कंपनियों के ऐप आप इस्तेमाल करते हैं, वो विदेश की हैं, चाहे वो सोशल मीडिया वेबसाइट्स से जुड़ी कंपनियां हों या शॉपिंग से, इसलिए उनका सर्वर भी दूसरे देश में है. इसके अलावा कंपनियां सुचारू ढ़ंग से काम करने के लिहाज़ से भी डेटा एक जगह पर स्टोर करना चाहती हैं. कई कंपनियों का अपना सर्वर नहीं होता, वो किसी थर्ड पार्टी के सर्वर का इस्तेमाल करती हैं.

भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर कहा, ''यह पाबंदी सुरक्षा, संप्रभुता और भारत की अखंडता के लिए ज़रूरी है. हम भारत के नागरिकों के डेटा और निजता में किसी तरह की सेंध नहीं चाहते हैं.''

पिछले 6 साल में जिन शेयरों में  विदेशी निवेशक लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं उनमें से अधिकांश  स्मॉल और मिडकैप कंपनियां है। बाजार दिग्गजों का कहना है कि विदेशी निवेशकों ने इन शेयरों में आर्कषक वैल्यूएशन और आगे इकोनॉमी में रिकवरी की उम्मीद में पैसे लगाए हैं लेकिन छोटी अवधि में हमें इन शेयरों में पैसे लगाने में बहुत सतर्क रहने की जरुरत है।

आईआईटी रोपड़ के बलविंदर सोढी बताते हैं, "कंपनियां कई जगहों पर अपना डेटा सेंटर नहीं बना सकतीं, अगर आप कहें कि वो एक डेटा सेंटर भारत में बना लें, या कोई राज्य अपने राज्य में बनाने को कहे, तो कंपनियों के लिए लागत बढ़ जाएगी, कुछ बड़ी कंपनियां जिनके पास बहुत पैसे हैं वो ऐसा कर सकती हैं. छोटी कंपनियों को जहां कम ख़र्च करना पड़ता हैं, वहां से ये सर्विस ले लेते हैं."

हालांकि ऐसा नहीं है कि भारत में ऐसे सर्वर नहीं हैं, लेकिन भारत में बड़े लेवल पर डेटा स्टोर करने वाली कंपनियां कम हैं. भारत में काम करने वाली कई कंपनियों के भी अपने सर्वर नहीं होते, वो देश या विदेश में दूसरे सर्वर का इस्तेमाल करती हैं.

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ऑनलाइन संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "सब इस बात से सहमत हैं कि विश्व को बेहतर भविष्य की आवश्यकता है. हम सभी को सामूहिक रूप से भविष्य को आकार देना है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि भविष्य के लिए हमारा दृष्टिकोण मुख्य रूप से अधिक मानव-केंद्रित होना चाहिए. साथ ही ग्रोथ के एजेंडा में ग़रीबों और वंचितों के लिए जगह होनी चाहिए."

उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि हमें इकोनॉमी धीरे-धीरे खुलती दिख रही है लेकिन आगे इकोनॉमिक गतिविधियों की चाल COVID-69 के हाल पर निर्भर करेगी। इसके साथ ही कोई निवेश निर्णय लेते समय हमें कंपनी के मैनेजमेंट क्वालिटी, बैलेंसशीट की मजबूती और बाजार प्रतिस्पर्धा में उसकी स्थिति पर जरुर नजर डालनी चाहिए।

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